शुक्रवार, 29 मई 2020

सुख-दुख

 हम जीवन में सुख चाहते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि सुख नहीं मिल पाता। इसके पीछे मूल कारण यह है कि हम स्वार्थ की भावना के साथ जीते हैं और प्रत्येक व्यक्ति के साथ अथवा प्रत्येक जीव के साथ हमारा व्यवहार सदैव स्वार्थ पूर्ण बना रहता है। यही स्वार्थ की स्थिति हमें सदैव अधोगति की ओर ले जाती है और जिसका परिणाम यह होता है कि हम निरंतर दुखी होते जाते हैं। हमें लगता है कि सुख तो हमारे बेहद करीब है लेकिन वह सुख वास्तव में सुख नहीं रहता। बल्कि वह तो दुखों का दरिया बन जाता है। ऐसी स्थिति में हमारा यह दायित्व बनता है कि हम अपने जीवन के मूल उद्देश्य को समझें और वह कार्य करें जिससे परिणामतः सुख की प्राप्ति हो।

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